कृष्ण का आभामंडल नीला क्यों?

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कृष्ण की हर छवि में एक नीलिमा जरूर दिखाई जाती है। एक व्यक्ति या एक व्यक्तित्व के रूप में उनके साथ आखिर क्यों जुड़ा है यह रंग? क्या है इस रंग की खासियत?

सत्येंद्र शर्मा, कुवैत/प्रतापगढ़
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आप देखेंगे कि इस जगत में जो कोई भी चीज बेहद विशाल और आपकी समझ से परे है, उसका रंग आमतौर पर नीला है, चाहे वह आकाश हो या समुंदर। जो कुछ भी आपकी समझ से बड़ा है, वह नीला होगा, क्योंकि नीला रंग सब को शामिल करने का आधार है
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आपको पता ही है कि कृष्ण के शरीर का रंग नीला माना जाता है। इस नीलेपन का मतलब जरूरी नहीं है कि उनकी त्वचा का रंग नीला था। हो सकता है, वे श्याम रंग के हों, लेकिन जो लोग जागरूक थे, उन्होंने उनकी ऊर्जा के नीलेपन को देखा और उनका वर्णन नीले वर्ण वाले के तौर पर किया।
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कृष्ण की प्रकृति के बारे में की गई सभी व्याख्याओं में नीला रंग आम है, क्योंकि सभी को साथ लेकर चलना उनका एक ऐसा गुण था, जिससे कोई भी इनकार नहीं कर सकता। वह कौन थे, वह क्या थे, इस बात को लेकर तमाम विवाद हैं, लेकिन इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि उनका स्वभाव सभी को साथ लेकर चलने वाला था।
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उनकी नीलिमा या सबको सम्मोहित करने की उनकी क्षमता कुछ ऐसी थी कि जो लोग उनके कट्टर दुश्मन हुआ करते थे, अनजाने में ही सही, लेकिन वे भी उनके सामने हार मान लेते थे। वे उन लोगों को भी आसानी से अपनी तरफ कर लेते थे, जो उन्हें बुरा कहते थे और न जाने कितनी ही बार उन्हें मारने की कोशिश कर चुके थे। हालांकि उनके और भी कई पहलू थे, लेकिन उनकी व्यक्तित्व की यह नीलिमा लगातार उनके हर काम में मदद करती थी। इसी वजह से वे बेहद सम्मोहक बन गए थे।
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चाहे आदमी हो या औरत, हर कोई शर्मो-हया छोड़ कर उनके प्रेम में पागल हो जाता था। लोग उन पर से अपनी नजरें नहीं हटा पाते थे। महिलाएं तो एक कदम और आगे थीं। पुरुषों के साथ यह दुर्भाग्य रहा है कि वे अपने प्रेम को आसानी से व्यक्त नहीं कर पाते। केवल एक शब्द कहने में ही आदमी की सारी उम्र निकल जाती है, लेकिन कृष्ण ऐसे नहीं थे। वह पूरी आजादी से खुद को व्यक्त करते थे।

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